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शनिवार, जनवरी 14, 2012

आज फिर तुम देख लेना हश्र मेरे इस फ़साने का....

आज फिर खुशियों का संसार छोड़ आया हूँ,
आज फिर अपने पुराने शहर लौट आया हूँ.
आज फिर आंसुओं में मुस्कुराया हूँ..
आज फिर खुद को समझाने आया हूँ..
आज फिर दर्द बांटने की चाहत लेके आया हूँ..
आज फिर दर्द में डूब कर चला आया हूँ..
आज फिर किसी अपने से चोट पाया हूँ..
आज फिर अपने को अपना न समझ पाया हूँ..
आज फिर जज्बात के टुकड़ों को ले थरथराया हूँ..
आज फिर कश्ती को लहरों पे छोड़ आया हूँ..
आज फिर मेरा दिल मेरे लिए ही तड़पता है..
आज फिर मेरे हाथ से कोई बिछड़ता है..
आज फिर मैं कुछ कहने से भी डरता हूँ..
आज फिर मैं कोई वादा करने से भी मुकरता हूँ..
आज फिर मेरे साथी ना मुझको ढून्ढ पाएंगे..
आज फिर मेरे संग ना वो मुस्कुराएंगे..
आज फिर मैं कह के चला हूँ के गम ना कर..
आज फिर मेरे लिए तू आँखे नम ना कर..
आज फिर रोया हूँ जार जार तन्हाई में..
आज फिर मेरी हकीकत छुप गयी मेरी परछाई में..
आज फिर तलाश लेना मुझको गम के दरिया में..
आज फिर समझ लेना मैं नहीं फूल तेरी बगिया में..
आज फिर चाँद मुझको देख कंपकपाया है..
आज फिर मैंने उसको अपना हाल-ए-दिल सुनाया है..
आज फिर तुम भी समझ लेना के मैं नहीं इस ज़माने का..
आज फिर तुम देख लेना हश्र मेरे इस फ़साने का..
आज फिर तुम देख लेना हश्र मेरे इस फ़साने का....
~बलदेव~

4 टिप्‍पणियां:

  1. ohhh Sorry Vasu.. I didn't see your comment.. kyaa karun, ham likhte hain aur bhool jate hain... thank you so much.

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  2. thank you so much Noopur.. Sorry, I was not on my blog since long but today visited and just saw your comment. thanks a lot..

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